- महाशिवरात्रि पर महाकाल में आस्था का सैलाब: 2 दिन में 8 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे, शीघ्र दर्शन से 62.50 लाख की आय; 1.95 करोड़ के 410.6 क्विंटल लड्डू प्रसाद की बिक्री
- महाकाल मंदिर में तड़के भस्म आरती, सभा मंडप से गर्भगृह तक गूंजा “जय श्री महाकाल”: स्वस्ति वाचन के बाद खुले चांदी के पट, पंचामृत अभिषेक और भव्य श्रृंगार के साथ हुए दिव्य दर्शन!
- महाशिवरात्रि पर महाकाल को अर्पित हुआ पुष्प सेहरा, दोपहर में हुई विशेष भस्म आरती; चार प्रहर पूजन के बाद हुआ दिव्य श्रृंगार
- उज्जैन में विक्रमोत्सव 2026 की शुरुआत: महाशिवरात्रि से 19 मार्च तक चलेगा सांस्कृतिक महापर्व, सीएम डॉ. मोहन यादव ने किया उद्घाटन; ‘शिवोह्म’ संगीत संध्या से सजी पहली शाम
- पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय: 18–19 फरवरी को ग्वालियर-चंबल और उज्जैन संभाग में बारिश के संकेत। कई जिलों में अलर्ट जारी; भोपाल-इंदौर में बादल छाने की संभावना, फरवरी में तीसरी बार बदलेगा मौसम
मौसम में बदलाव और लापरवाही से लोग हो रहे चर्मरोग के शिकार
उज्जैन। वर्षा ऋतु के दौरान तेजी से बदल रहे वातावरण की चपेट में आने के कारण कई लोग चर्मरोग के शिकार हो रहे हैं। स्थिति यह है कि शासकीय व निजी अस्पतालों में चर्मरोग की शिकायत लेकर पहुंचने वालों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है वहीं डॉक्टरों द्वारा लोगों को इस मौसम में सावधानी बरतने की बात कही जा रही है।
बच्चों से लेकर वृद्ध तक लोगों में फुंसियां, खुजली, दरात आदि चर्मरोगों की शिकायतें तेजी से सामने आ रही हैं। निजी अस्पतालों में स्थिति यह है कि प्रति डॉक्टर के क्लिनिक पर 50 से अधिक मरीज चर्मरोग की शिकायतें लेकर पहुंच रहे हैं और अपना उपचार करा रहे हैं। ऐसी ही स्थिति शासकीय अस्पताल की भी है। बारिश में भीगने अथवा नहाने के बाद लोग शरीर को ठीक से नहीं सुखाते इसके अलावा गीले और नमी वाले कपड़े भी पहन लेते हैं।
इस दौरान शरीर से निकलने वाले पसीने और नमीयुक्त कपड़ों के बीच शरीर में फंगस उत्पन्न होता है और यही चर्मरोग का कारण बनता है। लोगों को बारिश के मौसम में सूखे कपड़े पहनने के साथ ही नहाने के दौरान शरीर को पूरी तरह सुखाना चाहिये इसके अलावा कपड़े भी सूखे और ढीले पहनना चाहिये ताकि पसीना आने पर चर्मरोग से बचा जा सके।
वर्ष 2010 के बाद बढ़े मामले
बताया जाता है कि वर्ष 2010 के बाद बारिश के मौसम में चर्मरोग के मामलों में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है। चर्मरोग के मरीजों में अधिक संख्या ग्रामीणों की है क्योंकि खेत खलिहानों में काम करने के साथ धूल मिट्टी भरे वातावरण में रहने से उन्हें चर्मरोग की संभावना अधिक होती है। वातावरण में प्रदूषण और पहनावे में तेजी से हो रहे परिवर्तन के कारण शहरी लोग भी चर्मरोग के शिकार हो रहे हैं।
बिना सलाह के न लें दवाएं
दाद, खाज, खुजली जैसे चर्मरोग की स्थिति में अधिकांश लोग चर्मरोग विशेषज्ञ के पास न जाते हुए किसी भी मेडिकल स्टोर से क्रीम अथवा दवा ले लेते हैं। यह दवाएं चर्मरोग तो ठीक नहीं करतीं लेकिन उससे अन्य दूसरी बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है।
विशेष की राय
इस मौसम में चर्मरोग की समस्या तेजी से लोगों में होती है। जानकारी के अभाव में लोग मेडिकल से दवाएं लेकर काम चलाते हैं, लेकिन चर्मरोग होने पर सावधानी बरतने के साथ लोगों को विशेषज्ञ डॉक्टर से उपचार कराना चाहिये।
डॉ. एन.के. त्रिवेदी, चर्मरोग विशेषज्ञ